स्मोकर फ़ोन पे बात कर रहा था तभी उसे स्मोक करने की तलब जगी | और वो अपने कान पे रखी सिगरेट को निकालना चाहा लेकिन वो नाज़ुक सिगरेट हाथ के थोड़े से ही स्पर्श से हवा में तैरती हुई निचे गिरने लगी | ऐसा होने पे स्मोकर के दिल की धड़कने बढ़ गई | और वो सिगरेट को हवा में ही पकड़ लेना चाहता था लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाया और सिगरेट हवा में तैरती हुई निचे गिर गई जो स्मोकर को बहुत बुरा लगा और खुद को कितनी गालियों से सम्बोधित किया ये कोई और नहीं जान सकता | और वो खुद को कोसते हुए, सिगरेट को सॉरी बोलके उठा लिया | और उसे फूंक के और अपने टी-शर्ट से साफ़ करके मुह में लगा लिया और जेब से लाइटर निकाला और सिगरेट महाशय के पैर में आग लगा दि | और उसके जिस्म के जलने की आवाज़ शायद स्मोकर को सुनाई दे रही थी | लेकिन स्मोकर सिगरेट के बदन के जलने के धुंए को अपने फेफड़े में लेने के बाद जो सुकून मिला उसे, वो शायद और किसी चीज़ में ना मिले | स्मोकर की फ़ोन पे बातें परस्पर चलती रही | और सिगरेट का कद अब धीरे धीरे छोटा होने लगा था |
अब सिगरेट के सर के साथ थोडा गर्दन ही बचा था | उसका पूरा शरीर जल चुका था | उसका सारा खून जल के राख हो चूका था | अब उसमे कुछ नहीं बचा था | और स्मोकर के होठ जलने लगे थे | एक दो बार होठ जलने पे स्मोकर गुस्से में निचे फेंक दिया |
फेंकने के बाद वो जाने लगा, सिगरेट का सर अभी भी सुलग रहा था | क्या अब भी उसे बुझाने वाला कोई मिलेगा ? शायद हाँ, क्यूँ की आसपास कई पैर जाते हुए सिगरेट को नज़र आये | जलती हुई आग धीरे - धीरे उसके आँखों तक आ रही थी | उसने एक बार स्मोकर की तरफ देखा | पर स्मोकर मस्ती में जा रहा था | सिगरेट को लगा की शायद वो मुड़ेगा और मुझे जलते हुए देख के मेरे पास आएगा और मुझे बुझा के फिर अपने मुख से फूंक के साफ़ करेगा | और अपने टी-शर्ट से भी पोंछेगा और फिर कान पे रख लेगा | और फिर पहले की तरह मैं उसके कान पे नज़र आऊंगा | सिगरेट की बेचैनियाँ बड़ती गई कि स्मोकर अब मुड़ेगा ......अब मुड़ेगा .....तभी किसी का पैर सिगरेट के सर पे पड़ जाता है और उसके सर पे काफी चोट लग जाती है | और उस पैर के टक्कर से वो बीच सड़क पे आ जाता है और उसके बाद उसके सर पे कई पैर आते हैं और वो सिगरेट दम तोड़ देता है |
by Akhand Pratap Chauhan

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